भारत भूषण आर. गाँधी

सोशल मीडिया पर हर रोज सैकड़ों-हजारों पोस्ट डाली जा रही हैं। शेयर की जा रही हैं कि हम हिन्दुस्तानियों जैसा दुनिया में कोई नहीं हैं। न फौज में, न राजनीति में और न ही दर्शन में। लेकिन क्या हम हिन्दुस्तानी वास्तव में इतने कमाल के हैं? ये सवाल ज़रा खुद से करने वाला है, यहाँ खुद से मतलब हम से है, क्योंकि हो सकता है ख़ुद वाकई कमाल के हिन्दुस्तानी हों, लेकिन हम में शामिल नब्बे फ़ीसदी तो वाकई उस कमाल के हैं जिनकी बात यहाँ की जा रही है।

दरअसल यहाँ जिक्र उन लोगों के कमाल का है जो धड़ल्ले से कायदे क़ानून कि धज्जियाँ उड़ाते हैं और कुछ कहो तो खीझ जाते हैं या खीसें निपोर देते हैं। इटारसी मध्यप्रदेश का बहुत छोटा सा नगर है। हालाँकि रेलवे और ऑर्डनेन्स फैक्ट्री के कारण अपनी पहचान रखता है। पहले यह और केसला ब्लाक के कई ग्रामों को मिलाकर इटारसी विधानसभा क्षेत्र भी हुआ करता था, जो अब पिछले परिसीमन के कारण नर्मदापुरम में शामिल होकर अस्तित्वहीन हो गया है।

इसी इटारसी में किसी भी जगह पर खड़े होकर देखेंगे तो मात्र आधे घंटे में करीब दो दर्जन दुपहिया वाहन ऐसे दिखाई दे जायेंगे जिन पर वाहन का पंजीयन यानि दुपहिया के आरटीओ रजिस्ट्रेशन नंबर की प्लेट नदारद होगी। पहले यह होता था कि वाहन खरीदने के बाद जैसे ही आरटीओ से उसका नंबर मिलता व्‍यक्ति अपने नए दुपहिया वाहन पर पहले से ही लगी खाली सफ़ेद प्लेट पर नंबर लिखवा लेता था। जब वाहन पंजीकरण विभाग द्वारा एम्बोस की हुई नंबर प्लेट नए वाहनों पर लगाने का प्रावधान आया तब यह लगने लगा था कि अब हर नए वाहन पर एक जैसी रेडीमेड नंबर प्लेट्स दिखाई देने लगेंगी। लेकिन यह प्रक्रिया या सुविधा किन्हीं कारणों से आरटीओ कार्यालय से होना बंद हो गई।

आरटीओ एजेंट बताते हैं कि आजकल नंबर प्‍लेट्स विक्रेता कंपनी के शोरूम से ही तैयार होकर लगने लगी हैं। जो एक सामान्य शासकीय प्रक्रिया पूर्ण होते ही शोरूम पर जाकर लगवानी होती है। लेकिन वाहन खरीदने वाले कई लोग शोरूम जाकर नंबर प्लेट लगवाने में आलस कर रहे हैं। सामान्यतः 8 से 10 दिन में नंबर प्लेट तैयार हो जाती है और वाहन मालिक को अपना वाहन शोरूम पर जाकर उसे लगवाना होता है। ऐसे में यदि किसी वाहन पर नंबर प्‍लेट नहीं है तो इसे वाहन मालिक स्वयं की लापरवाही ही माना जाएगा।  

ऐसा नहीं है कि सड़कों पर केवल नए वाहन ही बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर बिदास दौड़ रहे हैं, बल्कि कई महान लोग तो कई सालों से बिना नंबर प्लेट का वाहन चला रहे हैं। ऐसे लोगों को वाहन चोरों की भी कोई चिंता नहीं है। ये कमाल के हिन्दुस्तानी यूँ ही लापरवाही के साथ न सिर्फ अपने वाहन चला रहे हैं बल्कि नियमों की धज्जियाँ भी सरेराह उड़ा रहे हैं। इटारसी नगर के पास के एक गाँव से रोजाना दूध लेकर आने वाला एक दूधिया पांच साल से भी ज्‍यादा समय से बिना नंबर के वाहन से ही आता जाता है।

और बात केवल ऐसे एक व्‍यक्ति की नहीं है। कुल मिलाकर यह ऐसी समस्‍या है जिस पर गंभीरता से ध्‍यान देने की जरूरत है। क्‍योंकि बना नंबर के वाहन से सिर्फ चोरी का ही मामला नहीं जुड़ा है, बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में क़ानूनी कार्रवाई से लेकर क़ानूनी मदद मिलने तक में यह लापरवाही बहुत बडी बाधा बनती है।
(मध्यमत)
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