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क्या हम हिंदी वाले खुश होना भी भूल गए हैं?

अजय बोकिल लगता है हम हिंदी वाले खुश होना भी भूल गए हैं। हिंदी कथाकार, उपन्यासकार गीतांजलि श्री के मूल हिंदी ‘रेत समाधि’ के अंग्रेजी में अनूदित उपन्यास ‘टूम ऑफ सैंड’ को मिले प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार की सुखद बयार भी आपसी तू-तू मैं-मैं, खेमाई चश्मों और मेरे-तेरे के दुराग्रहों के बीच खोती लग रही है। […]