अरविंद तिवारी

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अब एक नई भूमिका में हैं। यह भूमिका उन्हें बहुत पसंद आ रही है और इसका ऐलान भी खुद मुख्यमंत्री ने ही किया है। एक समय था जब शिवराज कहते थे, मैं मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं, सीईओ हूं। अब जब वे पेसा एक्ट के लिए आदिवासियों के बीच जाकर समझाइश दे रहे हैं, तो वे कहते हैं कि मैं आपका मास्टर ट्रेनर हूं। एक्ट के एक-एक प्रावधान को वे लोगों के बीच रखते हैं और पूछते हैं कि आपको समझ में आया या नहीं। जिन लोगों के बीच वे रहते हैं, उन्हें यह समझाने में भी पीछे नहीं रहते हैं कि अब आप ट्रैनर बन गए हो। जो मैं आपको बता रहा हूं, उसे अपने गांव में जाकर आपको लोगों को भी समझाना है। मास्टर ट्रेनर की इस भूमिका ने मंच पर शिवराज के अंदाज को भी बदल दिया।

ऐसा साहस तो कैलाश विजयवर्गीय ही दिखा सकते हैं

भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व मंत्री जयंत मलैया के अमृत महोत्सव के मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव खरी-खरी सुनाने से नहीं चूके। उन्होंने कहा जयंत जी मैं आपसे माफी चाहता हूं। आपको नोटिस देना हमारी बहुत बड़ी गलती है। जिस समय विजयवर्गीय मंच से यह कह रहे थे, तब सामने भाजपा के तमाम दिग्गज नेता बैठे थे और एक तरह से विजयवर्गीय की बात से रजामंदी जता रहे थे। इनमें से कुछ तो यह कहते हुए भी सुने गए कि ऐसा साहस कैलाश विजयवर्गीय जैसा नेता ही दिखा सकता है। दरअसल दमोह उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार की हार के बाद भाजपा नेतृत्व द्वारा मलैया को नोटिस दिया गया था। इसकी गूंज दिल्ली तक उठी थी और विजयवर्गीय ही वह नेता थे, जिन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने भी इस मामले में विरोध दर्ज करवाया था।

ऐसे निर्णय से ही ‘सरकार’ पर उंगली खड़ी होती है

लोकायुक्त के डीजी पद से साफ-सुथरी छवि वाले आईपीएस अफसर कैलाश मकवाना की रवानगी ने एक बार फिर लोगों को ‘सरकार’ के निर्णय पर उंगली उठाने का मौका दे दिया। यह किसी से छुपा हुआ नहीं था कि लोकायुक्त और मकवाना के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराहट थी। जिस अंदाज में मकवाना ने लोकायुक्त संगठन में काम शुरू किया था, वह संगठन के मुखिया के साथ ही कई अन्य लोगों को भी पसंद नहीं आ रहा था। मकवाना ने मातहत अमले पर भी नकेल कस दी थी और धरपकड़ की कार्रवाई भी बढ़ गई थी। इस सबके बीच लोकायुक्त की बात मान सरकार ने भले ही मकवाना को वहां से हटा दिया, लेकिन लोगों को तो उंगली उठाने का मौका मिल गया।

राहुल गांधी को पसंद आया, ‘बुजुर्ग’ कमलनाथ का यह अंदाज

कुछ भी कहो भारत जोड़ो यात्रा को मध्यप्रदेश में जो रिस्पांस मिला और जो व्यवस्था जुटाई गई, उसने ‘दरबार’ में कमलनाथ का कद तो बढ़ा दिया। पहले कांग्रेसी ही यह आशंका जता रहे थे कि ‘साहब’ यात्रा में पूरे समय रहेंगे ही नहीं। इससे ठीक उल्टा हुआ पूरे 12 दिन वे यात्रा में रहे, कभी पैदल चलते तो कभी गाड़ी में सवार हो जाते। रोज यात्रा के मैनेजमेंट लगी टीम की बैठक भी मार्निंग ब्रेक के बाद लेते और जो कमी नजर आती, उसे हाथोंहाथ दूर भी करवाते। शुरुआत के एक-दो दिन छोड़ दें तो बाद में राहुल गांधी की टीम भी कमलनाथ की मुरीद हो गई। कमलनाथ का यह अंदाज राहुल को कितना पसंद आया इसका अहसास तो यात्रा के मध्यप्रदेश से राजस्थान पहुंचने के बाद सबको हो गया।

‘बड़े साहब’ बरकरार, उम्मीद से बैठे कई अफसर निराश

मुख्य सचिव पद पर इकबाल सिंह बैंस के 6 महीने और बरकरार रहने के सरकार के फैसले ने मंत्रालय में बैठे उन तमाम अफसरों को बहुत निराश कर दिया, जो उम्मीद लगाए बैठे थे। ये अफसर जिन्हें बड़े साहब की पैनी निगाहों के कारण फील्ड पोस्टिंग नहीं मिल रही था या फिर मंत्रालय में ही लूप लाइन से बाहर नहीं निकल पा रहे थे, को लगा था कि अब उनके दिन फिर जाएंगे। लेकिन ऐसे तमाम अफसरों को अब 6 महीने और इंतजार करना पड़ेगा। कोई बड़ी बात नहीं कि 6 महीने का यह सेवा विस्तार अगले 6 माह और बरकरार रह जाए।

बहुत मुश्किल है सिंधिया के रुख और एमपीसीए की सियासत को समझना

जब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया चुप थे, तब तक एमपीसीए की सियासत को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही थी। खम ठोककर मैदान संभाल चुके अमिताभ विजयवर्गीय यह मान रहे थे सिंधिया और कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनैतिक सौहार्द का फायदा उन्हें मिलेगा और इस बार वे सेक्रेटरी बन जाएंगे। कुछ और लोग भी उम्मीद से थे। लेकिन जैसे ही सिंधिया ने संकेत दिया कइयों के अरमान ध्वस्त हो गए और सिवाय 2 बदलाव के अभिलाष खांडेकर पूरी टीम के साथ एमपीसीए में बरकरार रह गये। हां इस बार बीसीसीआई में जाने से वंचित रहे आपने कट्टर समर्थक राजू सिंह चौहान का जरूर सिंधिया ने ध्यान रख लिया‌। वैसे सिंधिया के सॉफ्ट कॉर्नर के अलावा 3 साल का सफल कार्यकाल भी टीम अभिलाष खांडेकर का मजबूत पक्ष रहा।

चलते-चलते

भाजपा के असंतुष्टों ने जयंत मलैया के अमृत महोत्सव के बहाने अपनी ताकत दिखाने के लिए एक बड़ा जमावड़ा तो कर लिया, लेकिन इस आयोजन में जिस अंदाज में शिवराज सिंह चौहान ने मलैया के प्रति प्रेम दर्शाया, उससे शिवराज विरोधियों का चौंकना स्वाभाविक था।

भाजपा का गुजरात फार्मूला सफल होने के बाद अब सबकी निगाहें मध्यप्रदेश पर हैं। यहां जो नेता इस दायरे में आकर टिकट खो सकते हैं, उन्होंने अपने परिवार में योग्य दावेदारों की तलाश शुरू कर दी है। ऐसे नेताओं में मालवा-निमाड़ के तीन मंत्री भी शामिल हैं। जरा सोचिए, कौन हैं ये मंत्री।

बात मीडिया की

रिपोर्टर की भूमिका में लाए गए भास्कर के दिल्ली में पदस्थ संपादक अवनीश जैन को मैनेजमेंट ने भारत जोड़ो यात्रा की रिपोर्टिंग के लिए भेजा था। नंबर बढ़ाने के चक्कर में जैन ने कुछ ज्यादा ही उत्साह दिखा दिया। यह उत्साह उन्हें भारी पड़ गया। उनकी एक खबर की हैडिंग पर एमडी सुधीर अग्रवाल इतने नाराज हुए कि जैन को आधी यात्रा से ही वापस बुला लिया। एमडी ने इस हैडिंग पर समूह के कई संपादकों की राय लेने के बाद कहा कि जब हम ही इसे समझ नहीं पा रहे हैं, तो पाठक क्या समझेगा।

नईदुनिया के स्टेट एडिटर सद्गुरुशरण को अपना ही एक फैसला वापस लेना पड़ा। उन्होंने पिछले दिनों एक फरमान जारी कर तीन महीने में 90 खबरों की प्लानिंग रिपोर्टिंग टीम से मांगी थी। रिपोर्टर्स ने जब इस पर विरोध दर्ज कराया तो स्टेट एडिटर बैकफुट पर आ गए और इस फैसले से पीछे हटना पड़ा।

दैनिक भास्कर समूह अपने कई संपादकों को लीडरशिप की ट्रेनिंग दिलवा रहा है। इसी क्रम में इंदौर के संपादक अमित मंडलोई इन दिनों जयपुर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। मंडलोई को प्रबंधन और बड़ी भूमिका में ला सकता है।

पत्रिका अखबार में कुछ दिन बिताने के बाद नगर निगम और आईडीए बीट के धुरंधर रिपोर्टर शैलेन्द्र वर्मा फिर प्रजातंत्र अखबार का हिस्सा हो गए हैं। वहां का माहौल उन्हें रास नहीं आया।

दैनिक भास्कर में संपादकीय टीम के इन्क्रीमेंट कई लोगों के लिए खुशी का कारण बना हुआ है तो कई इससे बेहद नाराज हैं। इन लोगों ने अपनी नाराजगी मैनेजमेंट तक भी पहुंचा दी है।

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