कोरोना हुआ तो डरना क्‍या? 

गिरीश उपाध्‍याय

आइसोलेशन में सबसे बड़ी मुश्किल होती है अकेलेपन को काटना। सबसे अलग-थलग रहना और एक अछूत सी जिंदगी जीना, यह स्थिति आपको मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत प्रभावित करती है। इसमें आप चिड़चिड़ेपन का शिकार हो सकते हैं और अवसाद का भी। कहने में यह बहुत आसान है कि हमें इन भावों को हावी नहीं होने देना है, लेकिन वास्‍तव में ऐसा करना मुश्किल होता है। पर जरूरी है कि हम जहां तक संभव हो शारीरिक और मानसिक दोनों संतुलन बनाए रखें। अकेलेपन को गीत संगीत सुनकर या अपनी रुचि का कोई और काम करके काटने की कोशिश करनी चाहिए। मैंने तो इस दौरान गीत संगीत भी सुना और कविताएं भी लिखीं।

लेकिन इसके अलावा मेरा सबसे ज्‍यादा समय जिस बात में कटा वो खुद के बजाय दूसरों की तकलीफ को सुनने और उनकी कोई न कोई मदद करने में। दरअसल जिस समय हमारा परिवार बीमार था उस समय परिवार के कई और सदस्‍य भी बीमार थे। इनमें से एक भोपाल में, दो इंदौर में और एक लखनऊ में थे। रोज उनका फोन आता या संपर्क होता और रोज कोई नई परेशानी मौजूद होती। ये तीनों ही मामले ऐसे थे जिन्‍हें डॉक्‍टरों ने गंभीर से लेकर अति गंभीर की श्रेणी में रखा हुआ था। ऐसे में फोन की घंटी किसी अनहोनी की आशंका के साथ ही बजती सुनाई देती थी।

मेरा मानना है कि यदि आप कोरोना का शिकार हो गए हैं तो अपने आसपास नजर घुमाकर जरूर देखें। निश्चित रूप से आपको अपने से ज्‍यादा कष्‍ट और खतरे में डले लोग दिखाई देंगे। आप पहले तो ईश्‍वर का धन्‍यवाद करें कि उनकी तुलना में आप कहीं बेहतर हालत में हैं। दूसरे यह सोचें कि बीमारी का शिकार हो गए अपनों की आप किस तरह मदद कर सकते हैं। इस तरह आपका समय भी कटेगा और दूसरों की मदद न भी हो पाए तो भी उन्‍हें एक संबल तो मिलेगा ही कि कोई है जिससे मदद ली जा सकती है या कोई है जो मदद करने की कोशिश कर रहा है। आपके मन भी एक संतोष का भाव पैदा होगा जो आपको मनोवैज्ञानिक रूप से ताकत और ऊर्जा देगा।

मदद करने के मामले में एक बात और कहना चाहूंगा। कोशिश करें कि आप किसी को झूठा दिलासा न दें। यदि कोई आपसे मदद मांग रहा है तो मानकर चलिये कि वह सचमुच कष्‍ट में है और उसे मदद की जरूरत है। आपकी कोशिश सफल होगी या नहीं इस पर जाने के बजाय आप इस पर जाएं कि कोशिश करके तो देखता हूं… हो सकता है शायद काम बन जाए… यह बात मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं… मुझे कई मामलों में सफलता नहीं मिली लेकिन कई मामलों में जान बचाने तक की हद वाली मदद मिल गई… सिर्फ इसलिए कि मैंने कोशिश जारी रखी।

ऐसे समय में हम या तो मदद मांगने वालों में से होते हैं या फिर मदद करने वालों में से। यदि आप मदद मांगने वालों में से हैं तो आपसे मैं यही कहना चाहूंगा कि अगर कोई मदद नहीं कर पाए तो आप भी किसी के प्रति कोई दुर्भावना न पालें। हो सकता है उसने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की हो पर हालात उसके बस में न रहे हों। इस समय हम अपने आसपास देख ही रहे हैं कि पैसा, रसूख कुछ भी काम नहीं आ रहा है, ऐसे में मदद न कर पाने पर किसी को दोषी मान लेना या कोसना ठीक नहीं। और हां, ऐसे समय में यदि किसी ने आपकी मदद की है तो ठीक हो जाने के बाद उसका शुक्रिया अदा करना मत भूलिये। शुक्रिया उन लोगों का भी अदा जरूर करिये जिनसे आपने मदद मांगी लेकिन किसी न किसी मजबूरी या परिस्थिति के कारण वे मदद न कर पाए।

आप सोच रहे होंगे कि सारी बातें हो गईं लेकिन इलाज और दवाई के बारे में मैंने कुछ नहीं कहा। तो मैं इसके बारे में कुछ कहने वाला भी नहीं हूं। मेरा सुझाव इतना भर है कि न तो कोई इलाज आप बिना डॉक्‍टर को दिखाए करें, न ही कोई दवाई बिना डॉक्‍टर से पूछे लें। इन दिनों चारों तरफ कोरोना इलाज के सुझावों और दवाइयों की बाढ़ सी आई हुई है। बिना सोचे समझे किसी भी उपाय को अपनाना या किसी चीज का सेवन करना आपके लिए हानिकारक भी हो सकता है।

एक बात याद रखिये। प्रकृति के किसी भी तत्‍व में गुण और अवगुण दोनों मौजूद हैं। हर चीज का फायदा है तो नुकसान भी है। ये जो सोशल मीडिया और अन्‍य माध्‍यमों पर तरह-तरह के उपाय और सुझाव दिए जा रहे हैं उनमें आपको सिर्फ उस वस्‍तु के फायदे के बारे में बताया जाता है, उससे होने वाले संभावित नुकसान के बारे में नहीं। किसी भी दवा या अन्‍य वस्‍तु के सेवन का फायदा और नुकसान दोनों होते हैं और वह वस्‍तु आपके शरीर की क्षमता और तासीर के हिसाब से परिणाम देती है। कहीं ऐसा न हो कि आप अनजाने में ही अपना कोई बड़ा नुकसान कर बैठें।

हां, दो तीन बातें कोरोना पीडि़त होने पर जरूर फायदा देती हैं, यह मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं। पहला गरम पानी पीना, दूसरा गरम पानी के गरारे करना और तीसरा भाप लेना। लेकिन इसे करते समय भी आप अपने शरीर की तासीर और क्षमता का ध्‍यान रखें, पर करें जरूर। कोई भी उपाय जरूरत से ज्‍यादा मात्रा में न अपनाएं, यह उलटे नुकसान कर सकता है। हमने अपना इलाज डॉक्‍टर की देखरेख में ही किया और वो ही दवाएं ली जो उसने कहीं। उतने ही दिन लीं जितने दिन के लिए उसने लिखीं। सिटी स्‍कैन कराया जरूर लेकिन डॉक्‍टर के कहने के बाद। उसमें भी सिर्फ दो लोगों का, तीसरे को डॉक्‍टर ने जरूरत नहीं समझी तो नहीं कराया।

कुल मिलाकर कोरोना से लड़ना और उसे हराना कोई मुश्किल काम नहीं है बशर्ते आप पूरी सावधानी बरतें, अपनी समझ का इस्‍तेमाल करें और खुद के साथ अनावश्‍यक प्रयोग न करें। समय पर ले लिया गया इलाज और बरती गई एहतियात आपको इस संकट से पूरी तरह बचा सकती है। और हां, कोरोना होने से पहले और कोरोना होने के बाद भी उससे बचने का प्रोटोकॉल नहीं भूलना है… यानी मास्‍क, सेनेटाइजेशन और सोशल डिस्‍टेंसिंग। हमारे डॉक्‍टर ने भी यह बात कही और हमें भी यह महसूस हुआ कि हम पर कोरोना का ज्‍यादा असर शायद इसलिए नहीं हुआ क्‍योंकि मैंने और पत्‍नी ने कोरोना वैक्‍सीन का पहला डोज ले रखा था। इसलिए आप भी पहली फुरसत में वैक्‍सीन लगवाएं। चाहे कोरोना टेस्‍ट कराने का मामला हो या वैक्‍सीन लगवाने का, थोड़ी मुश्किल जरूर आएगी, क्‍योंकि कई लोग इसके लिए इंतजार की लाइन में लगे हैं, पर उस लाइन से घबराकर आप टेस्‍ट कराने या वैक्‍सीन लगवाने का इरादा छोड़ें नहीं।

अंत में मैं उस बात को फिर दोहराना चाहूंगा जो मैंने अपने अनुभवों की इस श्रृंखला की पहली कड़ी में कही थी, कि हरेक व्‍यक्ति का अपना अलग अनुभव होता है, जरूरी नहीं कि मेरा अनुभव आपका भी अनुभव हो और मेरी दवा आपकी भी दवा हो। हां, एक चीज है जो समान रूप से मेरी भी है और आपकी भी… वो है सावधानी। इसलिये सावधान रहें, शरीर के लक्षणों की अनदेखी न करें और बीमार हो जाएं तो तत्‍काल समय पर इलाज करवाएं… ईश्‍वर सभी को इस बीमारी से बचाएं, नीरोग रखें…
सर्वे भवन्‍तु सुखिन: सर्वे सन्‍तु निरामय: … नमस्‍कार (समाप्‍त)