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आज के हालात पर एक सुंदर कविता…

दिनेश मालवीय”अश्क” बन रहे हैं घर बड़े परिवार छोटे हो गये भीड़ बढ़ती जा रही व्यवहार छोटे हो गये । बढ़ रही हैं दौलतें सुख-भोग सब बेइंतहा आदमी के पर अमल, क़िरदार छोटे हो गये। ऑनलाइन का चलन ऐसा बढ़ा है आजकल पहले से छोटे अधिक व्यापार छोटे हो गये। बन रहे हथियार अंधाधुंध दुनिया […]