लखनऊ/ समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान को गुरुवार को तगड़ा झटका लगा। सांसदों और विधायकों की विशेष अदालत ने उन्‍हें भड़काऊ भाषण देने के एक मामले में तीन साल की सजा सुनाई है। इस सजा के बाद आजम खान की विधायकी के साथ साथ उनके राजनैतिक कॅरियर पर भी खतरा रहा है।

अदालत के इस फैसले से समाजवादी पार्टी को भी झटका लगा है क्‍योंकि आजम खान सपा विधायक और सपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे हैं। पार्टी में उन्‍हें अखिलेश यादव के बाद बड़ा कद्दावर नेता माना जाता है। अदालत ने आजम को तीन साल की सजा सुनाते हुए उन पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने आजम को जमानत भी दे दी है।

आजम के खिलाफ तीन धाराओं में केस दर्ज हुआ था। तीनों ही मामलों में उन्हें दोषी माना गया है। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आजम पर भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि भाषण के दौरान उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। इससे पहले आजम खान ने फैसले की तारीख टालने के लिए यह कहते हुए आवेदन दिया था कि यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। पर कोर्ट ने उनकी दलील खारिज कर दी।   

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जब आजम खां लोकसभा का चुनाव लड़़ रहे थे तब सपा और बसपा का गठबंधन था। आजम चुनाव जीत गए थे। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के कई मामले विभिन्न थानों में दर्ज हुए थे। इनमें उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और तत्कालीन जिलाधिकारी के लिए अपशब्द कहे। धमकी दी और दंगा भड़काने का प्रयास किया। उन्‍होंने वर्ग विशेष से धर्म के नाम पर वोट की अपील भी की।

अदालत के इस फैसले को आजम के राजनैतिक कॅरियर के लिए खतरा इसलिए माना जा रहा है क्‍योंकि जनप्रतिनिधियों के लिए बने कानून के मुताबिक यदि किसी विधायक को दो साल से ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो फिर उसकी सदस्यता चली जाती है।